श्रीमद भागवत कथा में ठाकुर जी वोलेः भाग्यशाली होते है जो भगवान उत्सव में शामिल होते

फर्रूखाबाद। सहसपुर फर्रुखाबाद  में पूज्य शांतिदूत श्री देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के सानिध्य में चल रही विशाल श्रीमद भागवत कथा में आज सभी भक्तों को  चतुर्थ दिवस की कथा श्रवण कराई गयी। सर्वप्रथम कथा के मुख्य यजमान डॉ अनुपम दुबे एडवोकेट  ने सह.पत्नी व्यास पूजन व आरती कर महाराज जी से आशीर्वाद प्राप्त किया। आज चौथे कथा प्रसंग को प्रारंभ करते हुए ठाकुर जी ने कहा कि ऐसे लोग बड़े ही भाग्यशाली होते हैं जिन्हें भगवान के उत्सवों में शामिल होने का अवसर प्राप्त होता है और जो सच्चे भक्त व धर्म की रक्षा करने वाले होते हैं उन्हें भगवान स्वंय ही अपने उत्सवों में शामिल होने के लिए बुला लेते हैं।

आज जो कुछ भी हमारे पास है जिस पर हम अपना हक़ जमाते हैं वो सब कुछ हमें परमात्मा की देन है। ये सुख.सुविधाएंएधन.दौलत सब एक पानी के बबूले की तरह है। जिस प्रकार पानी का बबूला हमेशा नहीं रहता उसी प्रकार ये धन.दौलतएसुख.सुविधाएं हमेशा हमारे पास नहीं रहतीं अगर हमारे पास कुछ रहता है तो वो है भगवान की भक्तिए हालत चाहे जो भी हों भगवान की भक्तिएभगवान का नाम रूपी धन हम से कोई नहीं छीन सकता।

फिर भी इंसान उसी के पीछे भागता है जिसे एक न एक दिन नष्ट होना है और जो अजर.अमर है जिसको प्राप्त कर लेने के बाद हमारा जीवन ही नहीं हमारी मृत्यु भी संवर जाएगी उसे प्राप्त करने की कोशिश नहीं करता। ठाकुर जी ने कहा जब हम अपने समाज या अपने भगवान के प्रति कोई शुभ कार्य करते हैं तो भगवान उस समाज में हमारा दर्जा बढ़ा देते हैं जिससे लोग हमारे मरने की नहीं बल्कि जीने की भगवान से दुआ मांगे और जो भगवान के शुभ कार्यों में बढ.चढ़कर हिस्सा लेते हैं उन्हें दुआऐं मांगने की जरुरत नहीं पड़ती।

आज जो कुछ भी हमारे पास है वो सब कुछ हमें भगवान के प्रसाद के स्वरूप में मिला है लेकिन इस के बाद भी हम भगवान को भूलते जा रहे हैं। हम सोचते हैं कि आज हमारे पास जो कुछ भी है वो हमारी किस्मत में था। हमारी किस्मत को भगवान ही बनाते हैं और जो शुभ कर्म हम करते है वो भी हम से प्रभु ही करवाते हैं। ठाकुर जी ने कहा की ये शरीर हमारा न तो था न है और न ही रहेगा अगर हमारा कुछ है तो वो है हमारी आत्मा तो क्यों न हम अपने शरीर को संवारने की बजाय अपनी आत्मा को संवारें।

यह कटु सत्य है की इस शरीर को एक न एक दिन नष्ट होना है लेकिन हमारी आत्मा अजर.अमर है। पाप हमारा शरीर करता है और भोगना हमारी आत्मा को पड़ता है तो फिर हम ऐसा काम क्यों करें जिससे मृत्यु के पश्चात् हमरी आत्मा को कष्ट हो क्यों न भक्त ध्रुव और भक्त प्रह्लाद की तरह ऐसी भक्ति करें जिससे मृत्यु के पश्चात् हमारी आत्मा इस जीवन.मरण के चक्कर से मुक्त होकर प्रभु के श्री चरणों की सेवा में विलीन हो जाए।

आज की कथा में कृष्ण जन्मोत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया गया। सभी भक्तों के बीच कृष्ण जन्म की बधाईयाँ बाँटी गयी। कथा के मुख्य यजमान ने  सह.पत्नी कृष्ण भगवान का पूजन किया। कृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर पूज्य महाराज जी ने बड़े ही मधुर.मधुर भजन भक्तों को श्रवण कराये व कन्हैया के दीवानों ने झूम झूमकर भजनों का आनंद उठाया। आज कृष्ण जन्मोत्सव पर भक्तों की इतनी संख्या उमड़ी की पूरा पण्डाल भर गया। पण्डाल में स्थान न होने के कारण बहुत सारे भक्तों को बाहर से ही कथा का आनंद उठाना पड़ा।। भिन्न.भिन्न स्थानों से पधारी हुई भक्तों की अपार संख्या कथा का आनंद प्राप्त कर रही है

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