श्री रघुनाथ कथा : सत्य का संघ ही सत्संग है, राम जी का गुणगान जगत में मंगलकारी है

 

 

मोहम्मदाबाद फर्रूखाबाद। गांव सहसपुर में चल रही श्री रघुनाथ कथा के नौवे दिन कथा व्यास प्रेममूर्ति पूज्य सन्त श्री प्रेमभूषण जी महाराज ने सुन्दरकाण्ड और रामराज्याभिषेक (पूर्णाहुति) का वर्णन करते हुये कहा कि किसी से मैत्री करने के लिये स्वभाव और सोच मिलना चाहिये। सोच मिले या न मिले परन्तु स्वभाव अवश्य मिलना चाहिये। सन्त जी कहते है कि पिता वो योग्य है जो अपनी सन्तान को भगवत शरण में लगा दे। पाप रूपी पक्षियों का नाश करने के लिये भगवान बहेलिया है। स्वभाव को समझकर व्यवहार करना चाहिये। क्योंकि स्वभाव अपरिवर्तित सत्ता है। सत्य का संघ ही सत्संग है। विश्वास ही परमात्मा है विश्वास रखना चाहिये। हमारी श्रद्धा और भक्ति ही भगवान की ओर उन्मुख करा देती है।

वीर पुरूष कभी कायरता का अन्वेषण नहीं करता। कथा का वर्णत करते हुये प्रेमभूषण जी महाराज ने कहा कि राम जी का गुणगान जगत में मंगल करने वाला है। मुक्ति धन धर्म सिद्धी और भगवान का परमधाम सब देने वाला है। मंत्र महामणि है इसके लिए विषय रूपी सर्प के विष को उतारने के लिए ये रामगुणगान रामकथा मंत्र है जिस साधक को मंत्र सिद्धि होती है उसे कितना भी जहरीला सर्प दंश किया हो मंत्र उसे मारकर झाड़कर उतार देता है। महाराज जी ने आगे कहा कि सुख व शांति के लिए बहुत पैसे की जरूरत नहीं है, जिसके पास जितना अधिक धन होता है वह उतना ही अशांत होता है। ऐसा कौन है जो ब्राम्हण और कसाई में भेद नहीं जानता हो। कहा कि जानकर भी हम अपने को नहीं छलें।

यदि राम चरित मानस की कोई भी एक चैपाई जीवन में उतार लें तो जीवन सार्थक हो जायेगा। ये रामकथा है भगवान राम ने सभी को सीता माता को ढूंढ़ने के लिए कहा सभी को अलग-अलग दिशाओं में जाने के लिये कहा तभी जटायु जी ने कहा कि दक्षिण दिशा में ही सीता मां को ढूंढो नाथ, नील, अंगद सभी प्रणाम करते हुय जाने लगे लेकिन हनुमान सबसे बाद में प्रणाम करके आगे बड़े। भगवान ने पास बुलाया और सिर पर हाथ फेरा और उनको बहुत प्रकार से समझाया कि विरह के पल और वेग की कहकर आइये हनुमान जी लंका पहुंच गये वहां पर उन्हें सब देख दंग रह गये।

कथा वाचक संत प्रेमभूषण जी महाराज ने भगवान राम के आदर्शमय जीवन की चर्चा करते हुये कहा कि कोई सम्पत्ति अपने बेटो को देता है तो कोई बेटी-बहू को देता है। सम्पत्ति देना और लेना तो ठीक परन्तु उस संपत्ति का सही उपयोग हो तो, देना और लेना उचित है। उन्होंने कहा कि सम्पत्ति पाकर उसका सही इस्तेमाल करे, यही जीवन का प्रथम राज्याभिषेक है। बताया कि श्रीराम प्रभु का राज्याभिषेक हुआ इसके बाद उन्होंने सभी को बुलाया, कहा कि अनुशासन मानने वाले ही मेरे लिए प्रिय हैं। सबके साथ प्रिय बनकर साथ चलें। संत ने कहा कि ऐसा कोई नहीं जो अपने कर्म का फल नहीं भोगे। बड़े ही भाग्य से ही मनुष्य का तन मिलता है।

इसको व्यर्थ नहीं जाने दें। जो भजन करता है उसका खराब समय भी अच्छा हो जाता है। कहा कि भारत ऋषि-मुनियों, भक्तों, प्रेमियों का देश है। जब हम सत्कर्म में मग्न रहेंगे तब प्रभु की दृष्टि कब पड़ जाए कोई नहीं कह सकता। श्रद्धालु प्रभु राम की भक्ति में गोता लगाते रहे और कथा का आनंद लेते रहे। अंतिम दिवस की बेला में हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ तथा राजा राम का पूजन किया तथा व्यास जी को भी भेंट दक्षिणा से सम्मानित किया।

कथा के बाद मुख्य यजमान डॉ0 अनुपम दुवे एडवोकेट ने अपनी धर्मपत्नी श्रीमती मीनाक्षी दुवे, ब्लाक प्रमुख अमित दुवे ‘बब्बन’, अनुराग दुवे ‘डब्बन’ अभिषेक दुवे, सीतू दुवे एवं परिवार के साथ आरती उतारी। भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर नागेन्द्र सिंह राठौर विधायक, मनोज दुवे छिबरामऊ, रत्नेश दुवे छिबरामऊ, देवेश चन्देल, हरिवंश सिंह, भूपेन्द्र सिंह दिल्ली, मनोज चतुर्वेदी संकिसा, आशू दीक्षित संकिसा, शिवेन्द्र सिंह, सुशील मिश्रा आदि लोग उपस्थित रहे।

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