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कोरोना काल में डाक्टर्स किसी भगवान से कम नही : बचाव के लिये घर-घर दस्तक देगी आशा कार्यकर्ता

 

फर्रुखाबाद। आज के जमाने में डॉक्टरी ही एक ऐसा पेशा है, जिस पर लोग मरते दम तक विश्वास करते है। इसे बनाए रखने की जिम्मेदारी सभी डॉक्टरों पर है। डॉक्टर्स डे स्वयं डॉक्टरों के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है, क्योंकि यह उन्हें अपने चिकित्सकीय प्रैक्टिस को पुनर्जीवित करने का अवसर देता है। डॉक्टरों के समर्पण और ईमानदारी के प्रति सम्मान जाहिर करने के लिए हर वर्ष एक जुलाई को राष्ट्रीय चिकित्सक दिवस मनाया जाता है।

डा0 राममनोहर लोहिया महिला चिकित्सालय में तैनात स्त्री रोग विशेषज्ञ डा0 नमिता दास ने कहा कि जब से यह कोरोना नाम की महामारी आई है, सभी लोग दहशत के बीच काम कर रहे है। मेरे एक 5 वर्ष का बेटा है जब हम अस्पताल से घर जाते है, तो हमेशा यही डर लगा रहता है कि कहीं कोरोना तो नहीं ले जा रहे है। लेकिन मैं सोचती हूँ कि अगर हम लोग भी घर पर बैठ गए तो जो लोग हमारे भरोसे बैठे है उनका क्या होगा। अब तो मैंने ठान लिया है जो होगा देखा जायेगा हमें तो लोगों की सेवा ही करनी है, इसमें जो सुख मिलता है वो और कहाँ। लोग जब स्वस्थ होकर घर जाते हैं और दुआएं देते है तो लगता है कि हमें सब कुछ मिल गया है।

कोविड 19 अस्पताल एल 1 बरौन में तैनात डा0 नीरज यादव सैफई जिला इटावा के रहने वाले है। डा0 नीरज ने कहा कि जबसे मेरी ड्यूटी कोरोना संक्रमित मरीजों की देखभाल में लगाई गयी है तब से मैं अपने घर भी नहीं गया, बस सभी लोगों से फ़ोन द्वारा ही बात हो जाती है। बेटा और माता पिता को देखे करीब 4 माह हो गए है, घर की बहुत याद आती है लेकिन जब कोरोना से ग्रसित मरीजों की ओर देखता हूँ तो लगता है इनको मेरी अधिक जरुरत है।

डा0 नीरज ने बताया कि कोरोना पॉजिटिव आने के बाद आईसोलेशन में भर्ती होने पर लोगों के अन्दर डर बना होता है। हमारा सबसे पहला काम होता है उनको समझाकर भयमुक्त करना। सर्वप्रथम हम उनके साथ अपनेपन की भावना लाते है। एक दो दिन बाद ही लोग यहां के माहौल में ढ़ल जाते है, कोरोना को हरा कर जब विजयी होकर जाने की ख़ुशी के साथ ही हमसे बिछडने का अफसोस भी करते है कि आपने उस समय मेरा साथ दिया जब मेरे साथ कोई नही था।

उन्होने कहा कि अपनी आदत में सुरक्षा के 3 प्रमुख उपाय पर ही फोकस रखने पर संक्रमित होने से बचा जा सकता है। 2 मीटर की दूरी, साबुन से हाथ धोते रहना और सार्वजनिक क्षेत्रों में हाथ जेब में रखना, मुंह पर 3 लेयर का साफ मास्क पहने रहना, भीड से दूर रहना, आम आदमी के लिये यह पर्याप्त है। हम लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होती है। फेस सील्ड और दस्तानों के साथ पीपीई किट पहननी होती है। इन दिनों थोडा कष्ट दायक है लेकिन लोगों की स्वास्थ्य सेवा के लिये जरूरी है।

डाक्टर की कहानी कोरोना मरीजों की जुबानी

फतेहगढ़ ग्वालटोली निवासी अनुज प्रताप ने बताया कि मैं गुडगाँव हरियाणा में नौकरी करता था, जब मैं घर वापस आया तो मैंने अपनी जाँच कराई तो मैं कोरोना से ग्रसित निकला। ऐसे में हम सभी डर गए की मेरा अब क्या होगा, लेकिन जब अस्पताल में भर्ती कराया गया तो वहाँ के स्टाफ ने हम लोगों का मनोबल को बढाया कि कुछ नहीं हुआ आप जल्द स्वस्थ हो जाओगे। जब हम स्वस्थ हुए और अपने घर को चले तो ऐसा लगा कि कोई अपना छुट रहा है।
माली वाली गली निवासी इखलाक ने बताया कि अगर यह सरकारी डाक्टर न होते तो शायद आज हम भी न होते, इन लोगों ने ऐसे समय पर हमारा इलाज किया जब कोई पास भी नहीं आना चाहता।

 

संचारी रोगों से बचाव को हर घर पर दस्तक देंगी आशा

 

कोविड संक्रमण के बीच स्वास्थ्य विभाग ने विशेष संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के लिए कमर कस ली है। शासन के निर्देश पर एक जुलाई से 31 जुलाई तक संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान चलाया जाएगा। इस संबंध में मंगलवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नवाबगंज के सभागार में आशा, आशा संगिनी और एएनएम को संचारी रोग नियंत्रण एवं दस्तक अभियान के तहत सोशल डिस्टेंसिंग प्रोटोकॉल का पालन करते हुए रोगों से निपटने व घर.घर दस्तक देने का प्रशिक्षण दिया गया।

सीएचसी नवाबगंज के चिकित्साधीक्षक डा0 सुमित ने बताया कि सीएचसी के अंतर्गत आने वाली आशा, आशा संगिनी और एएनएम को फिजिकल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए प्रशिक्षण दिया गया है। एक जुलाई से सभी आशा अपने अपने क्षेत्रों में हर घर पर दस्तक देंगी तथा कोरोना वायरस और संचारी रोग नियंत्रण के बारे में लोगों को जानकारी देने के साथ ही जिन घरों में 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चे है और घरों पर स्टीकर चस्पा करेंगी।

प्रशिक्षण के दौरान यह भी बताया गया कि इस बार कोरोना के चलते कोई भी जागरूकता कार्यक्रम नहीं हो पा रहे है, ऐसे में हम सभी का दायित्व बनता है कि अपने आस पास साफ सफाई रखें और संक्रामक रोगों से बचे रहे। इसके साथ ही दोनों अभियानों के दौरान फ्रंटलाइन वकर्स न तो किसी का दरवाजा छुएंगे और न ही कुंडी, घर के भीतर भी नहीं जाएंगे बस संदेश और स्टीकर के जरिए दस्तक दिया जाएगा।

यूनिसेफ के डीएमसी तारिक साहब ने बताया कि जनपद पहले ही कोरोना संक्रमण की चपेट में चल रहा है। अब बरसात में जलभराव के कारण मच्छर पैदा होने से संक्रामक रोगों के फैलने का खतरा भी रहेगा। संचारी रोगों व दिमागी बुखार के नियंत्रण के लिए जन जागरूकता का होना अति आवश्यक है। अभियान के दौरान एएनएम, आशा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सफाई कर्मचारी दस्तक अभियान के दौरान घर घर जाकर संक्रामक रोगों, मच्छर जनित रोगों और कोविड के बारे में जानकारी देंगे और उन्हें बचाव के उपाय बताएंगे।

प्रशिक्षण के दौरान आशा कार्यकर्ताओं को बताया गया कि स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, मच्छरों की रोकथाम, खुली नालियों को बंद करना, जलभराव को रोकना, खुले में शौच पर रोकथाम से बीमारियों पर सीधा प्रहार किया जा सकता है। इस दौरान यूनिसेफ के बीएमसी विपिन सहगल, सीएचसी के बीपीएम पियूष, बीसीपीएम विजय पाल और आशा, आशा संगिनी और एएनएम मौजूद रही।

 

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