फर्रुखाबाद (एफबीडी न्यूज़) 6 जुलाई सपा के कट्टर समर्थकों ने विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन का जबरदस्त विरोध शुरू कर दिया है। नगर पालिका के वार्ड नंबर 33 चंद्रगुप्त नगर के मोहल्ला मनिहारी निवासी वरिष्ठ सपा नेता एवं सभासद रफी अंसारी ने कांग्रेस प्रत्याशी लुईस खुर्शीद के विरुद्ध चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है। उन्होंने अपना प्रचार भी शुरू कर दिया है। सभासद रफ़ी अंसारी ने एफबीडी न्यूज़ को बताया कि लगातार चौथी बार सभासदी मेरे परिवार में है। 2006 से 2012 तक मैं सभासद रहा। 2012 से 2017 तक पत्नी रज़िया अंसारी सभासद रही। 2017 से मैं सभासद हूं। 2022 के चुनाव में मेरी जिले में एतिहासिक सबसे बड़ी जीत हुई है। 
उन्होंने बताया कि मेडम लुईस खुर्शीद 2022 विधानसभा चुनाव में 2045 वोट पाकर पुनः चुनाव मैदान में आ रही हैं अगर वह चुनाव लड़ेगी तो मैं सौ प्रतिशत चुनाव लडूंगा। कांग्रेस का कद कितना है जनपद में कांग्रेस उम्मीदवारों का वोट का डाटा देखें, काग्रेस के साथ गठबंधन से सपा को नुकसान होगा। कांग्रेस बसपा खुद चुनाव जीतने के योग्य नहीं, सिर्फ किसी को जिताने के काम आते हैं। माना जा रहा है सपा मुखिया अखिलेश यादव विधानसभा चुनाव में कांग्रेस से गठबंधन करेंगे। गठबंधन होने पर सदर विधानसभा सीट कांग्रेस के खाते में जाएगी और कांग्रेस की ओर से लुईस खुर्शीद ही चुनाव लड़ेंगी। इसीलिए लुईस खुर्शीद ने सदर विधानसभा क्षेत्र में तेजी से जनसंपर्क शुरू कर दिया है। कोई भी सपा कार्यकर्ता या नहीं चाहता है कि पार्टी का सदर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस से गठबंधन हो।
2022 के चुनाव में सदर विधानसभा क्षेत्र में मात्र 2045 वोट मिलने के कारण उनकी जमानत जप्त हो गई थी। मालूम हो कि कांग्रेस जिले में हांसिये पर चल रही है जिले में कांग्रेस का कोई प्रधान अथवा सभासद भी नहीं है। जनाधार खिसक जाने के कारण विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद का भी जनपद वासियों से मोह हो गया है। 2022 के चुनाव में सपा ने गठबंधन के तहत यह सीट महान दल के केशव देव मौर्य को दी थी। केशव देव मौर्य की पत्नी श्रीमती सुमन शाक्य सपा के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ी थी उनको 72998 वोट मिले थे। भाजपा प्रत्याशी मेजर सुनील दत्त द्विवेदी को 112314 वोट, बसपा के विजय कुमार कटियार को 16611 आम आदमी पार्टी के नीरज प्रताप शाक्य को मात्र 758 वोट मिले थे।
पिछले चुनाव में सपा प्रत्याशी बात कांग्रेस प्रत्याशी एवं बसपा प्रत्याशी जोड़ दिया जाये तब भी भाजपा प्रत्याशी को हराना मुश्किल है। सपा ही एक मात्र ऐसी पार्टी है जो भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकती है। सपा की ओर से शाक्य का प्रत्याशी दमदारी से चुनाव होता है। अल्पसंख्यक एवं यादव समाज का वोट मददगार साबित होगा। दसको पूर्व सपा के दमदार प्रत्याशी लाल बहादुर शाक्य भाजपा के काबीना मंत्री ब्रह्मदत्त द्विवेदी को चुनाव में कड़ी टक्कर देते रहे। एक बार श्री शाक्य मतगणना के दौरान हार्ट अटैक पढ़ जाने के कारण जीतते-जीतते चुनाव हार गए थे।

