फर्रुखाबाद (एफबीडी न्यूज़) 2 अगस्त) जनपद में गंगा एवं रामगंगा नदियों के बढ़ते जलस्तर के दृष्टिगत जिला प्रशासन द्वारा बाढ़ की स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य युद्धस्तर पर संचालित किए जा रहे हैं तथा आमजन की सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। दैनिक बाढ़ रिपोर्ट के अनुसार आज प्रातः 8 बजे पांचालघाट स्थित लोहिया सेतु पर गंगा नदी का जलस्तर 136.90 मीटर दर्ज किया गया, जबकि खतरे का निशान 137.10 मीटर है। नरौरा बैराज से लगभग 1,72,721 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। वहीं रामगंगा नदी में ब्रह्मदत्त द्विवेदी सेतु पर जलस्तर का मापन नहीं हो सका तथा बैराज से 1,560 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
जनपद की तीनों तहसीलों के 12 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं, जिनमें राहत एवं बचाव कार्यों के लिए 17 नाव एवं 1 मोटर बोट लगातार संचालित की जा रही हैं। वर्तमान में किसी भी परिवार का विस्थापन नहीं हुआ है तथा जनहानि, पशुहानि एवं फसल क्षति की कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई है।बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के तहत 1 एनडीआरएफ एवं 1 पीएसी की टीम तैनात है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा 46 ओआरएस पैकेट, 159 क्लोरीन टैबलेट वितरित की गई हैं तथा 112 लोगों का उपचार किया गया है। प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में लगातार स्वास्थ्य सेवाएं, पेयजल, स्वच्छता एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। बाढ़ से प्रभावित गांवों में सदर तहसील के कटरी भीमपुर, कटरी धर्मपुर एवं कटरी शिकारपुर, कायमगंज तहसील के कमथरी, समाचीपुर चितार एवं सौदपुर पिस्तैर तथा अमृतपुर तहसील के करनपुर, कोडरी सारंगपुर, आसमपुर, रतनपुर रम्हौआ, मड़ैया तौफ़ीक़ एवं तीराराम की मड़ैया (चाचूपुर) शामिल हैं।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जिला प्रशासन के अधिकारी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में सतत भ्रमण कर राहत एवं बचाव कार्यों की नियमित निगरानी करें तथा किसी भी आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करें। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में विद्युत आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में जिला पंचायत राज अधिकारी प्रत्येक बाढ़ प्रभावित ग्राम में 5 नग टॉर्च एवं रस्सी की व्यवस्था कराएं। उन्होंने मुख्य चिकित्सा अधिकारी को निर्देश दिए कि कांवड़ यात्रा के निर्धारित मार्ग पर आवश्यकतानुसार एम्बुलेंस एवं चिकित्सा शिविर की स्थापना कराएं, इसके साथ ही संबंधित उप जिलाधिकारी, खण्ड विकास अधिकारी एवं मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी आपसी समन्वय के साथ यह सुनिश्चित कर लें कि कोई भी पशु कांवड़ यात्रा मार्ग पर विचरण न करे, पशुओं को पशु शरणालय में ही रखा जाए। जिलाधिकारी ने आमजन से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, नदी किनारे जाने से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल जिला प्रशासन एवं संबंधित अधिकारियों को सूचित करें।

