फर्जी मुकदमे की पोल खुली: कोर्ट ने सर्राफ प्रशांत वर्मा की अर्जी खारिज की, अधिवक्ता विजय प्रताप सिंह की पैरवी

फर्रुखाबाद (एफबीडी न्यूज) 24 अक्टूबर 26। कोतवाली फर्रुखाबाद में सर्राफ प्रशांत वर्मा द्वारा दर्ज कराए गए चोरी के झूठे मुकदमे की सच्चाई अदालत में सामने आ गई है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, फर्रुखाबाद की अदालत ने केस क्राइम संख्या 128/26 (धारा 123, 305 BNS) के मामले में ऐतिहासिक आदेश पारित करते हुए वादी प्रशांत वर्मा के उस प्रार्थना पत्र को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उसने जप्तशुदा सोने के आभूषण और 7,86,150/- रुपये अपने पक्ष में रिलीज कराने की मांग की थी।

मालूम हो कि मोहल्ला कूंचा भवानी दास निवासी सर्राफ प्रशांत वर्मा ने 22 जून 26 को कोतवाली फर्रुखाबाद में जेवरात चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने मनगढ़ंत आरोप लगाया था कि सिमरन वर्मा ने उसके घर आकर उसकी पत्नी को कोल्ड ड्रिंक में कुछ मिलाकर बेहोश कर दिया और घर की अलमारी से सोने के हाथ चूडी़ आदि करीब 100 ग्राम वजनी 14 लाख कीमती जेवरात निकाल कर चली गयी। अधिवक्ता विजय प्रताप सिंह ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि अदालत में उनके तर्कों फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है।

अदालत में सुनवाई के दौरान अभियुक्तता सिमरन वर्मा की ओर से पैरवी करते हुए ने जोरदार आपत्ति प्रस्तुत की। विद्वानअधिवक्ता विजय प्रताप सिंह ने अदालत के समक्ष पुख्ता तर्क रखते हुए साबित किया कि वादी द्वारा लगाया गया चोरी का आरोप पूरी तरह झूठा है और बरामद की गई केस प्रॉपर्टी वास्तव में वादी की नहीं, बल्कि अभियुक्तता की है। वादी द्वारा प्रस्तुत किए गए बिल और दस्तावेज भी अवैध और अस्वीकार्य बताए गए। अदालत ने पत्रावली का बारीकी से अवलोकन करने के बाद माना कि मामले में संपत्ति के स्वामित्व को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है और यह पूरी तरह से झूठा व विवेचनाधीन मामला है।

अदालत ने वादी प्रशांत वर्मा के प्रार्थना पत्र को खारिज करते हुए विवादित संपत्ति को मालखाने में सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश से स्पष्ट हो गया है कि वादी ने सिमरन वर्मा के खिलाफ एक फर्जी मुकदमा दर्ज कराया था।

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