संकिसा एवं बुद्ध स्तूप के विकास में बाधक बने अहंकारी भाजपा नेता

फर्रुखाबाद (एफबीडी न्यूज) 31 अक्टूबर 26। ऐतिहासिक बुद्ध नगरी संकिसा एवं भगवान बुद्ध के स्तूप के विकास में बाधक बने एक मात्र अहंकारी भाजपा नेता है। वो है अतुल दीक्षित निवासी संकिसा, वह पहले भारतीय जनता पार्टी में जिला उपाध्यक्ष थे आप कोई भी पद नहीं है। महान सम्राट अशोक के शासन काल में संकिसा में भगवान बुद्ध के अवशेष रख स्तूप बनवाया गया था। इसी लिए पुरातत्व विभाग ने स्तूप स्थल की भूमि को अधिग्रहित कर चारों ओर बाउंड्री का निर्माण कराकर फाटक लगाया था। स्तूप के देखरेख के लिए चौकीदार की भी तैनाती की गई। बौद्ध कथाओं के अनुसार बिसारी भगवान बुद्ध की मौसी थी उनकी मूर्ति स्तूप के ऊपर स्थापित की गई थी।

करीब 5 दशक पूर्व संकिसा निवासी कथित पुजारी गिरी ने बिसारी की प्रतिमा गायब कर दी और उसके स्थान पर बिसारी देवी की मूर्ति बनवाकर स्थापित कर दी। उसे दौरान बौद्ध धर्मी स्तूप की ओर कोई ध्यान नहीं देते थे और न ही महोत्सव के दौरान काफी भीड़ एकत्र होती थी। तभी से सनातन धर्म के ठेकेदार ने बिसारी देवी को महिमा मंडित कराकर उनकी पूजा शुरू करा दी। बुद्ध अनुयाई श्रद्धा होने के कारण स्तूप पर नहीं जाते हैं, जबकि अतुल दीक्षित चार साथियों के साथ बिसारी देवी की प्रति वर्ष पूजा करते हैं। बुद्ध के स्तूप के कारण ही संकिसा में गेस्ट हाउस का निर्माण कराकर टेलीफोन एक्सचेंज लगाया गया था। शुरुआत में भिक्षु धम्मालोको ने संकिसा गेस्ट हाउस के सामने एक कमरे में बुद्ध विहार की स्थापना की थी। बुद्ध से लगाव होने के कारण संकिसा निवासी चंद्रिका प्रकाश दीक्षित एवं मुख्ता प्रसाद दीक्षित भाइयों ने बौद्ध धर्म का प्रचार कर अपने आवास पर संकिसा के अवशेषों को संरक्षित करके म्यूजियम बनाया। चंद्रिका प्रसाद के पुत्र राघव दीक्षित के द्वारा म्यूजियम की देखभाल कर बौद्ध धर्म का कारवां बढ़ाया जा रहा है।

पूरा इलाका चाहता है कि बुद्ध स्तूप के संबंध में किसी प्रकार का कोई विवाद न रहे और स्तूप व संकिसा क्षेत्र का भरपूर विकास हो। भाजपा विधायक सुशील शाक्य के प्रयास से संकिसा तिराहे से स्तूप तक सड़क के साथ ही फुटपाथ का निर्माण कराया गया। स्तूप परिसर के चारों ओर परिक्रमा करने की सुविधा के लिए में गेट तक पक्के फुटपाथ का निर्माण कराया गया। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह एवं विधायक सुशील शाक्य ने बिसारी देवी मंदिर के विवाद को निपटाने का भरपूर प्रयास किया। विधायक श्री शाक्य ने कह दिया था कि यदि बिसारी देवी की मूर्ति को स्तूप से हटाकर अलग कहीं मंदिर का निर्माण कराया जाए तो वह मंदिर का पूरा खर्चा उठाने को तैयार है। पूरे इलाके में चर्चा है कि केवल एकमात्र व्यक्ति अतुल दीक्षित नहीं चाहते हैं की बिसारी देवी मंदिर का विवाद न निपटे और न ही संकिसा का विकास हो सके।

अतुल दीक्षित चाहते हैं की बिसारी देवी मंदिर का विवाद इसी तरह चलता रहे और वह बिसारी देवी समिति के कथित अध्यक्ष की हैसियत से अपनी ताकत दिखा सके। बीते बरसों पूर्व अतुल दीक्षित के सांसद मुकेश राजपूत से अच्छे संबंध थे किसी बात को लेकर दिलों में खटास आ गई। उसके बाद अतुल दीक्षित ने क्षेत्रीय विधायक सुशील शाक्य से मधुर संबंध बनाए। वर्ष 2021 में अतुल दीक्षित के समर्थकों ने धम्म यात्रा कर स्तूप से निकलने वाले श्रद्धालुओं के ऊपर जबरदस्त पथराव किया था। बवाल की घटना के दौरान विधायक सुशील शाक्य भी स्तूप परिसर में ही फंस गए थे। डीएम एसपी ने मौके पर जाकर अराजक तत्वों को खदेड़ कर बुद्ध अनुयाइयों को निकलने के लिए सुरक्षात्मक रास्ता बनाया था। तभी से अतुल दीक्षित के सुशील शाक्य से अनबन हो गई।

संकिसा नगर पंचायत अध्यक्ष बनने के बाद अतुल दीक्षित ने सभासद पत्नी की आड़ में चेयरमैन के प्रतिनिधि भाजपा नेता राहुल राजपूत से हिस्सेदारी को लेकर जबरदस्त टकराव हो गया। भाजपा नेता अतुल दीक्षित ने अब अपना प्रभाव कायम रखने के लिए एमएलसी प्रांशु दत्त द्विवेदी का सहारा लिया है। श्री दीक्षित बीते दिनों प्रांशु दत्त द्विवेदी के प्रयास से ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भेंट की है। मुख्यमंत्री के आवास के फोटो से साफ जाहिर होता है कि प्रांशु दत्त द्विवेदी ने योगी आदित्यनाथ से अकेले में मुलाकात की। उन्होंने ही फोटो खिंचवाने के लिए अतुल दीक्षित को बुला लिया होगा। संकिसा क्षेत्र के लोगों ने अतुल दीक्षित को सलाह दी है कि वह जल्द ही विवाद को निपटाकर संकिसा के बेहतर ढंग से होने वाले विकास कार्य में सहयोग करें।

भाजपा नेता अतुल दीक्षित ने आरोपी के संबंध में निम्न प्रकार अपने प्रतिक्रिया दी है।

यह कहना बिल्कुल गलत है कि अतुल दीक्षित संकिसा विकास के बाधक है क्योंकि मेरे पास फर्रुखाबाद गजेटियर के सरकारी दस्तावेज वर्ष 1911 की छायाप्रति एवं अंग्रेजी शासन काल वर्ष 1871 का पुरातत्व सर्वे रिपोर्ट भारत सरकार की छाया प्रति दिखा रहा हूं जिसमें साफ उल्लेख मिलता है कि बिसारी देवी मंदिर के दक्षिण दिशा में मंदिर से 200 फिट दूरी पर बौद्ध स्तूप स्थित है।

जब विवाद सरकारी दस्तावेजों की अनदेखी कर बिना किसी प्रमाण के मनगढ़ंत कहानियों के आधार पर यदि बौद्ध अनुयायियों को गुमराह करके जबरदस्ती विवाद की स्थिति पैदा की जा रही है उसका मेरे पास कोई समाधान नहीं है। में भी यह चाहता हूं कि विकास होना चाहिए लेकिन सनातनियों की आस्था पर चोट करते हुए ही अगर विकास संभव है तो मुझे स्वीकार नहीं है।

मैं फर्रुखाबाद गजेटियर वर्ष 1911 की व आर्कियोलॉजिकल सर्वे वर्ष 1871 की रिपोर्ट प्रमाण के रूप में उजागर कर रहा हूं। यदि बौद्ध अनुयायियों के पास कोई सरकारी दस्तावेजों का साक्ष्य उपलब्ध हो तो उसे सार्वजनिक किया जाए। अब रही बात मेरी पर्सनल लाइफ़ भाजपा से जुड़ा राजनीतिक करियर मनगढ़ंत ढंग से बताना गया है पत्रकार स्वतंत्र हैं। रही बात मेरी मैं भारतीय जनता पार्टी का वर्ष 1992 से आज तक भारतीय जनता पार्टी का कार्य करता था और हूं और रहूंगा यह मेरा अपना निजी मत है।

रही बात आदरणीय सांसद मुकेश राजपूत जी एवं माननीय विधायक सुशील शाक्य जी एवं माननीय प्रांशु दत्त द्विवेदी जी सदस्य विधानपरिषद आदि सभी भारतीय जनता पार्टी के लोगों से मेरे संबंध पूर्व में भी अच्छे थे आज भी अच्छे हैं और भविष्य में भी अच्छे रहेंगे यह मेरी निजी राय है मुझे बदनाम करना हो शौक से करे।

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