फर्रुखाबाद (एफबीडी न्यूज़) 3 नवंबर 26। संकिसा के ऐतिहासिक बुद्ध महोत्सव में उपेक्षित किए जाने से भिक्षुगण हताश हो गए हैं। कहा जाता है कि समूचे विश्व में बिना बिना भिक्षुओं की उपस्थिति में बुद्ध का कार्यक्रम नहीं किया जाता है। संकिसा में 26 अक्टूबर को आयोजित बुद्ध महोत्सव में भिक्षुओं की सरेआम उपेक्षा किए जाने का मामला चर्चा का विषय बन गया है। सूबे के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने 26 अक्टूबर को धम्मालोको बुद्ध विहार के टीन शेड सभागार में आयोजित बुद्ध महोत्सव में अपने विचार व्यक्त किए थे। आयोजक कार्यक्रम स्थल पर पर्याप्त भीड़ भी नहीं जुटा सके थे। भीड़ की कमी को देखने के बावजूद भी कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भिक्षुओं को आमंत्रित नहीं किया गया। जबकि संकिसा के बुद्ध विहारों में सैकड़ों भिक्षु मौजूद थे। 
बताया गया है कि आयोजक ने भिक्षुओं को मंच के नीचे कुर्सियों पर बैठने के लिए कहा था भिक्षुओं ने मंच पर सम्मानजनक स्थान के बजाय मंच के नीचे बैठकर अपमानित होने से साफ मना कर दिया था। कार्यक्रम में सांसद मुकेश राजपूत, विधायक सुशील शाक्य, विधायक डॉ सुरभि, पूर्व विधायक ममतेश शाक्य, जिला पंचायत अध्यक्ष मोनिका यादव, भाजपा जिलाध्यक्ष फतेहचंद वर्मा, भाजपा नेता राहुल राजपूत, रूपेश गुप्ता, संदीप शाक्य, अवनीश शाक्य आदि नेताओं की मौजूदगी के कारण पूरा मंच भाजपामय हो गया था। मंच पर जनपद मैनपुरी के दर्जा प्राप्त राज्य मंत्री पैक्स पेड के चेयरमैन प्रेम सिंह शाक्य को बैठने के लिए स्थान तक नहीं दिया गया। मंच पर गिनती के ही बुद्ध समर्थक थे। 
विधायक ने बचाई आयोजक की इज्जत
भाजपा विधायक सुशील शाक्य ने अपनी प्रतिष्ठा से जोड़कर उपमुख्यमंत्री का कार्यक्रम बुद्ध महोत्सव में लगाया था। उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य में जनपद मैनपुरी के जसराजपुर स्थिति वाईबीएस सेंटर के कार्यक्रम में आए थे। जनपद मैनपुरी में डिप्टी सीएम का कार्यक्रम लगने से पूर्व बुद्ध महोत्सव के आयोजक उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से कार्यक्रम के लिए अपना संपर्क नहीं बना पाए थे। बुद्ध महोत्सव में अपार भीड़ जुटाने का दावा करने वाले बुद्ध महोत्सव के आयोजक 26 अक्टूबर को सुबह निकलने वाली धम्म यात्रा में शामिल नहीं हुए थे। उन्होंने बुद्ध विहार के सामने पंचशील ध्वज लहराकर धम्म यात्रा रवाना करने की खाना पूर्ति की थी।

तब कार्यक्रम के आयोजक ने अस्वस्थ होने की जानकारी दी थी। लेकिन 26 अक्टूबर को दोपहर के समय जब थाने का दरोगा आयोजक को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के संबंध में वार्ता के लिए बुलाने गया था तब आयोजक तुरंत ही दरोगा के साथ पुलिस के वाहन में बैठ कर बुद्ध स्तूप चले गए थे। आयोजक ने मनमानी करके उपमुख्यमंत्री के स्वागत के लिए मंच पर जाने वाले चार लोगों की सूची में स्वयं सहित अपने बेटे व भतीजे का नाम शामिल किया था।
जब इस बात की भनक कार्यक्रम में सहयोग करने वालों को हुई तो उन्होंने नाराजगी जताते हुए दबाव डालकर सूची में अपने कई लोगों के नाम शामिल कराये। दिखावा करने के लिए आयोजक कार्यक्रम के संबंध में सहयोगियों के साथ बैठक करते हैं लेकिन मनमाने ढंग से ही फैसला करके अमल करते हैं। मनमानी करने के कारण आयोजक के विरुद्ध बुद्ध महोत्सव के सक्रिय कार्यकर्ताओं में जबरदस्त रोष व्याप्त है।



























