11 कीटनाशक दवाइयों की बिक्री एवं प्रयोग पर प्रतिबंध

फर्रुखाबाद (एफबीडी न्यूज़) 27 अगस्त। बासमती चावल के कीटनाशी अवशेषमुक्त उत्पादन एवं निर्यात को बढावा देने हेतु प्रदेश सरकार ने बासमती चावल में प्रयोग होने वाले 11 कीटनाशकों की बिक्री एवं प्रयोग करने पर प्रतिबंध लगाया है। जिला क्रूस अधिकारी शैलेंद्र कुमार वर्मा ने किसानों एवं जनपद के समस्त कीटनाशी विक्रेताओं को सूचित किया है कि शासन ने अधिसूचना के माध्यम से कीटनाशी अधिनियम के अधीन प्रदत्त शक्तियों और अन्य समस्त समर्थकारी शक्तियों का प्रयोग करके राज्यपाल 1 अगस्त 2026 से 60 दिनों की अवधि के लिए अधिसूचना में।

जनपद फर्रुखाबाद में बासमती, धान की फसल में ट्राइसाइक्लाजोल, बुप्रोफेजिन, एसीफेट, क्लोरपाइरीफॉस, टेबुकोनोजोल, प्रोपीकोनाजोल, थायोमेथाक्साम, प्रोफेनोफॉस, इमिडाक्लोप्रिड, कार्वेण्डाजिम एवं कार्बोफ्यूरान कीटनाशकों के सभी प्रकार के फार्मूलेशन की बिकी, वितरण और प्रयोग को प्रतिषिद्ध किया है। ताकि गुणवत्तायुक्त बासमती चावल के निर्यात में वृद्धि की जा सके।

जनपद फर्रुखाबाद में बासमती धान की खेती लगभग 25332 हेक्टेयर क्षेत्रफल में की जाती है। कृषि विभाग का यह प्रयास होता है कि आपके द्वारा जो भी फसल का उत्पादन किया जा रहा है उसका आपको अधिक से अधिक मूल्य मिल सके। बासमती चावल का अधिक मूल्य प्राप्त करना तभी सम्भव है जब बासमती चावल का अधिक से अधिक दूसरे देशों में निर्यात हो इसके लिए हमें कुछ सावधानियों बरतनी होगी।

क्योंकि बासमती चावल आयात करने वाले देश यूरोपीय संघ, यू०एस०ए० एवं खाडी देश जैसे आयातक देशों में कीटनाशकों के अधिकतम अवशेष स्तर के कडे मानकों के कारण बासमती चावल के निर्यात को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। अन्तर्राष्ट्रीय बाजार में मॉग कम हो जाने से इसका सीधा असर यहाँ के बाजार मूल्य पर पडा है जिससे किसान भाइयों को जो मूल्य मिलना चाहिए वह नही मिल पाता इन्हीं बातो को ध्यान में रखते हुए उपरोक्त प्रतिबंधित कीटनाशकों के स्थान पर वैकल्पिक रसायनों का प्रयोग करें।

कीटनाशक रसायन ट्राइसा इक्लाजोल के स्थान पर स्यूडोमोनास 0.5 प्रतिशत डब्ल्यू०पी०, बुप्रोपोजिन के स्थान पर फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एस०सी०, बाईफेन्थिन 10 प्रतिशत एस०सी०, एसीफेट के स्थान परफिप्रोनिल 5 प्रतिशत एस०सी०, कार्बोसल्फान 25 प्रतिशत ई०सी०, क्लोरपाइरीफॉस के स्थान पर कारटाफ हाइड्रोक्लोराइड 4 प्रति० जी० आर०, बाईफेन्थिन 10 प्रतिशत एस०सी० 5, टेबुकोनोजोल के स्थान पर स्यूडोमोनास 0.5 प्रतिशत डब्ल्यू०पी० 6, प्रोपीकोनाजोल के स्थान पर स्यूडोमोनास 0.5 प्रतिशत डब्ल्यू०पी०, डाइफेनोकोनाजेल 25 प्रतिशत ई०सी० 7।

थायोमेथाक्साम के स्थान पर,8 लेम्ब्डासाईहैलोथ्रिन 5 प्रति० ई०सी, क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एस०सी०, प्रोफेनोफॉस के स्थान पर लेम्ब्डासाईहैलोथ्रिन 5 प्रति० ई०सी, फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एस०सी० 9, इमिडाक्लोप्रिड के स्थान पर कारटाफ हाइड्रोक्लोराइड 4 प्रति० जी० आर०, लेम्ब्डासाईहैलोथिन 5 प्रति० ई०सी 10, कार्वेण्डाजिम के स्थान पर स्यूडोमोनास 0.5 प्रतिशत डब्ल्यू०पी०, डाइफेनोकोनाजेल 25 प्रतिशत ई०सी० 11 एवं कार्बोफ्यूरान के स्थान पर फिप्रोनिल 0.3 प्रतिशत जी०आर०, कारटाफ हाइड्रोक्लोराइड 4 प्रति० जी० आर० रसायन का प्रयोग करें।

जिला कृषि अधिकारी ने जनपद के समस्त कृषकों एवं निजी कीटनाशक विकेताओं को स्पष्ट रूप से अवगत कराया है कि दिये गये निर्देशों का शत प्रतिशत पालन करना सुनिश्चित करें ताकि बासमती चावल का स्वस्थ्य एवं गुणवत्तायुक्त उत्पादन किया जा सके।

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