फर्रुखाबाद (एफबीडी न्यूज़) 29 अगस्त। सनातनियों के लिए जिस तरह सावन का महीना पवित्र पावन है उतना ही सतनामी साधो के लिए भी सावन का महीना पावन और श्रेष्ठ माना जाता रहा है। साध समाज के प्रमुख अमर साध ने बताया कि सतनामी साधो के इतिहास से ये पता चलता है कि साल भर साध अपनी जीविका चलाने हेतु अल्प व्यापार रोजगार करते थे। पर सावन के महीने में सिर्फ मालिक का नाम और सुमरन ध्यान को ही अपनी वरीयता देते थे। 
बीते २ दशक पहले तक सतनामी साधो की एक टोली सावन महीने के दौरान गंगा किनारे स्थित पुरानी विसरातों में बने दरीचो में चटाई बिछा कर रहते थे। वही पर सात्विक और स्वच्छ भोजन बना कर ग्रहण किया करते थे, अधिकांश समय सिर्फ और सिर्फ मालिक के नाम ज्ञान और ध्यान में व्यतीत किया करते थे। कहा जाता है कि हमारे बुजुर्गो के जैसे आचरण होंगे वैसा ही हमारा समाज बन के तैयार होगा। इसी राह पर आज भी साध समाज चल रहा है। सावन के पावन महीने में फर्रुखाबाद साधवाडा स्थित चौकी साधान में प्रमुख रूप से दो जगह बाल सभा का आयोजन किया जा रहा है, जो विगत वर्षों से निरंतर होता आ रहा है।
इसमें एक बाल सभा बालिकाओं की लगती है जिसकी वर्तमान में प्रमुख हमारी निर्दोष बुआ जी है जिनके द्वारा बालिकाओं को सावन महीने में सिर्फ ज्ञान रूपी वार्ता और सत्य का अनुसरण करना, अपने विचारों में सादगी के साथ साथ अपने भोजन में सात्विकता लाना (सादा भोजन उच्च विचार) वाली कहावत को चरितार्थ होते सहज ही देखा जा सकता है। इसी तरह उनकी सहयोगी के रूप में प्रेम कुमारी बाई सुधा बाई, जोगिना बाई, मधु बाई, शशी बाई,कामिनी,सोनाली, समता, मोनिका, गुंजन,विनीता, प्रीति, शिखा व अन्य बाईयों का सहयोग निरंतर बना रहता है।
वही दूसरी ओर बालकों की सभा लगती है जिसमें बच्चों को सत्य और ईमानदारी की राह दिखाने का कार्य ज्ञानप्रकाश साध, लोकेंद्र भान साध, सुनील साध, अखिलेश साध, सुनील साध द्वितीय, अनमोल साध, शिवम साध व अन्य साध मार्ग दर्शक के रूप में अपनी भूमिका का निर्वाहन करते है। इस सभा का सफल संचालन कपिल साध करते है। इन बालको और बालिकाओं के द्वारा पूरे महीने जो सच्ची लगन और श्रद्धा से इस नेक कार्य में लगते है उनको साध संगत की तरफ से अंत में प्रोत्साहन के रूप में कुछ सप्रेम भेंट इनाम के रूप में भी दी जाती है जिससे मासूम नौनिहालों के चेहरे खुशी से खिल उठते है जिनको देख कर हम सभी का हृदय भी भाव विभोर हो जाता है।

