फर्रुखाबाद (एफबीडी न्यूज़) 9 सितंबर। अदालत ने आज महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान भाजपा नेता के विरुद्ध केस की एफआर खारिज कर मुकदमें की पुनः विवेचना का आदेश दिया है। न्यायालय अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट /सिविल जज (सी०डि०) त्वरित न्यायालय, फर्रुखाबाद प्रकीर्ण वाद संख्या-14/2026 राज्य बनाम वादी अनिल कुमार सिंह थाना राजेपुर आज प्रकीर्णवाद आदेशार्थ पेश हुआ। पूर्व तिथि पर वादी के विद्वान अधिवक्ता को अन्तिम आख्या के विरूद्ध प्रस्तुत प्रोटेस्ट पिटीशन दिनांकित 01-06-2026 पर सुना जा चुका है।
पत्रावली का अवलोकन किया। वादी/आपत्तिकर्ता अनिल कुमार सिंह द्वारा अपनी प्रोटेस्ट पिटीशन में कथन किया गया कि उपरोक्त मुकदमें के विवेचक सुदेश कुमार एस०आई० थाना राजेपुर ने अभियुक्तगण से साज कर मामले में सही विवेचना न करते हुए इण्डियन आयल कार्पोरेशन लि० क्षेत्रीय कार्यालय से प्रार्थी के नाम के फर्जी शपथपत्र की प्रति जानबूझकर प्राप्त नही की तथा मात्र खानापूरी करने के उददेश्य से प्रार्थना पत्र, शपथपत्र की प्रति मांगने का देकर मात्र अपना बचाव किया है। विवेचक ने अभियुक्तगण से साज कर जानबूझकर अपने विधिक कर्तव्यों व दायित्वों का निर्वहन नही किया है तथा विधिक प्रावधानों में कार्यवाही करने के स्थान पर विवेचना समापत कर अन्तिम आख्या प्रेषित कर जानबूझकर लापरवाही की है।
इस कारण विवेचकों के विरूद्ध धारा 199 बी०एन०एस०एस० में भी विधिक कार्यवाही किया जाना अपेक्षित है। प्रकरण में जिस प्रपत्र फर्जी के शपथपत्र की कूटरचना कर धोखाधड़ी से फर्जी अनापत्ति शपथपत्र प्रार्थी की तरफ से दिया जाना कहा गया है। उक्त शपथपत्र इण्डियन आयल कार्पोरेशन लि० क्षेत्रीय कार्यालय आगरा के कब्जे में है, जो विवेचना के द्वारा ही साक्ष्य संकलन किया जा सकता है, अन्यथा वादी न्याय से वंचित रह जायेगा। अतः प्रस्तुत मामले में विवेचक द्वारा प्रेषित अन्तिम आख्या सं० 07/2026 निरस्त कर प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र स्वीकार कर प्रकरण में अग्रिम विवेचना कराये जाने की याचना की गयी है। पत्रावली के अवलोकन से विदित होता है कि प्रार्थी / वादी के प्रार्थना पत्र अन्तर्गत धारा 173(4) बी०एन०एस०एस० पर न्यायालय द्वारा पारित आदेश के अनुपालन में थाना राजेपुर पर मु०अ०सं० 152/2025 धारा 319 (2), 318(4), 338, 336(3), 340(2) बी०एन०एस०एस० के तहत अभियुक्तगण अवनीश शाक्य व अशोक कुमार के विरूद्ध प्रथम सूचना रिपोर्ट पंजीकृत की गयी जिसमें विवेचक द्वारा विवेचना की गयी।
विवेचक द्वारा प्रस्तुत प्रकरण में अन्तिम आख्या इस आधार पर प्रेषित की गयी कि विवेचनात्मक कार्यवाही से यह साबित नही हुआ कि आरोपीगण द्वारा वादी मुकदमा अनिल कुमार के फर्जी हस्ताक्षर कर कूटरचित दस्तावेज तैयार कर प्रयोग किया गया हो। मुकदमा उपरोक्त के सम्बंध में क्षेत्रीय प्रबंधक आईओसीएल क्षेत्र आगरा को मुकदमें से सम्बंधित रिपोर्ट दिनांक 31-12-2025 को भेजी गयी थी, जो प्राप्त नही हुई है, जिसकी आवश्यकता भी प्रतीत नही होती है तथा
जिसके सम्बंध में वादी द्वारा दिये गये अन्य प्रपत्रों से ऐसा कोई साक्ष्य नही पाया गया।
अंतिम आख्या न्यायालय में प्राप्त होने के पश्चात वादी मुकदमा को नोटिस जारी किया गया। वादी मुकदमा न्यायालय उपस्थित आया और उसकी ओर से प्रोटेस्ट प्रार्थना पत्र दाखिल अन्तिम आख्या का विरोध किया गया। वादी द्वारा प्रोटेस्ट पिटीशन में मुख्य रूप से कथन किया गया है कि प्रकरण में जिस प्रपत्र फर्जी के शपथपत्र की कूटरचना कर धोखाधड़ी से फर्जी अनापत्ति शपथपत्र प्रार्थी की तरफ से दिया जाना कहा गया है। उक्त शपथपत्र इण्डियन आयल कार्पोरेशन लि० क्षेत्रीय कार्यालय आगरा के कब्जे में है, विवेचना के द्वारा ही उक्त साक्ष्य का संकलन किया जा सकता है।
पत्रावली के अवलोकन से यह भी विदित होता है कि विवेचक द्वारा क्षेत्रीय प्रबंधक आईओसीएल क्षेत्र आगरा से रिपोर्ट प्राप्त हुए बिना प्रकरण में अन्तिम आख्या प्रेषित कर दी गयी, जबकि उक्त रिपोर्ट विवेचना में अपराध का महत्वपूर्ण थी। वादी के प्रार्थना पत्र में अंकित कथनों को दृष्टिगत रखते हुए इस प्रकरण में अग्रिम विवेचना कराया जाना आवश्यक प्रतीत होता है। मामले के तथ्य एवं परिस्थितियों को दृष्टिगत रखते हुए अग्रिम विवेचना कराया जाना न्यायोचित प्रतीत होता है। ऐसी स्थिति में इस स्तर पर पुलिस द्वारा प्रेषित अंतिम आख्या स्वीकार किये जाने योग्य नहीं है और प्रकरण को अग्रिम विवेचना हेतु प्रेषित किया जाना न्यायसंगत प्रतीत होता है। तदनुसार निम्नांकित आदेश पारित किया जाता है।
आदेश वादी मुकदमा द्वारा प्रस्तुत प्रोटेस्ट पिटीशन दिनांकित 01-06-2026 स्वीकार की जाती है तथा पुलिस द्वारा प्रेषित अंतिम आख्या संख्या 07/2026 दिनांकित 09-02-2026 निरस्त की जाती है। प्रभारी निरीक्षक / थानाध्यक्ष थाना राजेपुर को निर्देशित किया जाता है कि वह प्रकरण में धारा 173 (8) दण्ड प्रक्रिया संहिता के तहत आदेश में दिये गये निर्देशों के अनुक्रम में अग्रिम विवेचना कराया जाना सुनिश्चित करे। सम्बन्धित प्रभारी निरीक्षक / थानाध्यक्ष को निर्देशित किया जाता है कि विवेचना आवंटन के पश्चात अग्रिम विवेचना के परिणाम से तीन माह के अंदर न्यायालय को अवगत कराये। आदेश की एक प्रति सम्बन्धित प्रभारी निरीक्षक / थानाध्यक्ष को अविलम्ब प्रेषित की जाये। पत्रावली वास्ते अग्रिम कार्यवाही हेतु दिनांक 25-11-2026 को पेश हो।
(आकाश गुप्ता)
अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट /सिविल जज (सी०डि०.) एफ०टी०सी०
पीड़ित पक्ष अनिल कुमार सिंह की ओर से अधिवक्ता दीपक द्विवेदी ने पैरवी की है। मालूम हो कि अदालत के आदेश पर राजेपुर थाना पुलिस ने भाजपा नेता अवनीश शाक्य के विरुद्ध फर्जीवाड़ा का केस दर्ज किया था। थाना राजेपुर के ग्राम खंडोली निवासी अनिल कुमार सिंह पुत्र जागेश्वर पाल ने अदालत के आदेश पर दर्ज कराई रिपोर्ट में आवास विकास कॉलोनी निवासी अवनीश शाक्य पुत्र शैतान सिंह शाक्य प्रबन्धक, सचिव बुद्धिस्ट एजूकेशन एण्ड वेलफेयर सोसायटी आवास विकास कालोनी एवं कोतवाली कायमगंज के ग्राम जौरा निवासी अशोक कुमार पुत्र रामानंद को आरोपी बनाया है। अनिल कुमार ने अदालत में दायर किए गए मुकदमे में कहा है कि गाटा संख्या 25 स्थित ग्राम कनकापुर परगना खाखटमऊ तहसील अमृतपुर का सह स्वामी है।
इसके अलावा इसी गाटा संख्या 25 में बुद्धिस्ट एजूकेशन एण्ड वेलफेयर सोसायटी आवास विकास कालोनी के प्रबन्धक / सचिव अवनीश शाक्य पुत्र शैतान सिंह शाक्य सह खातेदार है। उक्त अवनीश शाक्य एवं अशोक कुमार संयुक्त रूप से इसी गाटा संख्या 25 में इण्डियन आयल कारपोरेशन लिमिटेड की पेट्रोल पंप का लाइसेंस लेकर उसको संचालित कर रहा है। इण्डियन आयल कारपोरेशन की नियमावली के अनुसार सह खातेदारों की अनापत्ति लगाया जाना जरूरी है। लेकिन अवनीश शाक्य व अशोक कुमार ने फर्जी ढंग से प्रार्थी को ससुर कागज़ों में दर्शा दिया है और अवनीश शाक्य एवं अशोक कुमार ने धोखाधडी एवं फर्जी ढंग से कूट रचित का शपथपत्र तैयार कर इण्डियन आयल कारपोरेशन में जमा किया है। इण्डियन आयल कारपोरेशन मार्केटिंग डिवीजन आगरा ने 6-2-25 को पत्र जारी कर उसमें ससुर और शपथपत्र का जिक्र किया है।
मैंने कभी कोई अनापत्ति एवं शपथपत्र अवनीश शाक्य एवं अशोक कुमार के पक्ष में अंकित एवं निष्पादित नहीं किया है। अवनीश शाक्य एव अशोक कुमार ने इण्डियन आयल कारपोरेशन के दिशा निर्देशों एवं नियमावली की अवहेलना कर फर्जीवाडा किया है।

