आलू किसानों को राहत के लिए ऑनलाइन आवेदन: किसानों के लिए टेडी खीर

फर्रुखाबाद (एफबीडी) न्यूज 9 सितंबर। जिला प्रशासन ने आलू किसानों को राहत देने के लिए बैठक कर ऑनलाइन आवेदन मांगे हैं। किसानों ने राहत के नाम पर खानापूर्ति करने का आरोप लगाया है। आलू एवं शाक भाजी अधिकारी राघवेंद्र सिंह ने मीडिया को बताया कि आज  कलेक्ट्रेट सभागार में उद्यान विभाग द्वारा जनपद में संचालित भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना एवं शीतगृह में भण्डार प्रभार में अनुदान की योजना का आयोजन किया गया।

बैठक में सांसद मुकेश राजपूत विधायक भोजपुर नागेन्द्र सिंह राठौर, विधायक अमृतपुर, सुशील शाक्य, फतेहचन्द्र वर्मा जिलाध्यक्ष भाजपा, जिलाधिकारी डॉ० अंकुर लाठर, मुख्य विकास अधिकारी, विनोद कुमार गौड़ एवं उप निदेशक कृषि अरविन्द मोहन मिश्र, शीतगृह एसोशिएसन अध्यक्ष अजय गंगवार व जनपद के एफ०पी०ओ०/एफ०पी०सी०, प्रगतिशील कृषक/आलू उत्पादक इत्यादि उपस्थित रहे।

उद्यान विभाग, उत्तर प्रदेश द्वारा जनपद में आलू उत्पादक कृषकों को उनकी आलू उपज की लागत के सापेक्ष उचित मूल्य दिलाने हेतु नवीन योजना- भामाशाह भाव स्थिरता कोष योजना एवं शीतगृह में भण्डारण प्रभार में अनुदान की योजना लागू की गई है। के सम्बन्ध में जनपद के निजी शीतगृह स्वामी/प्रबन्धक, कृषक उत्पादक संगठन / कृषक उत्पादक कम्पनी तथा प्रगतिशील कृषकों के साथ आलू भण्डारण, विक्रय एवं निर्यात से सम्बन्धित कार्यशाला / बैठक के आयोजन में विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

उपस्थित शीतगृह स्वामी व कृषकों से योजना के सम्बन्ध में सुझाव भी मांगे गये ताकि सुझावों संकलित कर जिलाधिकारी व जनप्रतिनिधि के माध्यम से शासन स्तर पर भेजे जा सके। जिससे योजना का संचालन सुचारू रूप से किया जा सके। उक्त के सन्दर्भ में जनपद के समस्त कृषको को अवगत किया जाता है कि भण्डारित आलू के भण्डारण प्रभार पर अनुदान हेतु एवं भामाशाह भाव स्थिरता कोष की स्थापना की योजना का लाभ लेने हेतु सम्बन्धित निम्न प्रपत्र जैसे-मोबाइल नम्बर, आधार की छायाप्रति, बैंक पासबुक की छायाप्रति, कृषक आई०डी०, भूमि (जिस भूमि पर आलू हुआ, उसका खसरा खतौनी), कोल्ड स्टोरेज की रसीदें (हस्ताक्षरित भण्डार रसीद, कोल्ड स्टोरेज किराया भुगतान रसीद, गेट पास/लाट निकासी रसीद, बोरी गणना/चट्टा रसीद आदि विभागीय ऑनलाइन पोर्टल https://potato.uphorticulture.in/ पर पंजीकरण कर सकते है।

आलू आंदोलन के प्रभारी अशोक कुमार कटियार ने कहा है कि सरकार आलू किसानों को मुआवजा देने के नाम पर खानापूर्ति कर रही है। पूर्व में 22 लाख मैट्रिक टन आलू खरीदने की घोषणा के बावजूद 1 किलो आलू तक की खरीदारी नहीं की गई। जिसके कारण अब राहत देने की योजना पर भी सवालिया निशान लग गया है। किसानों से जिस तरह के प्रपत्र मांगे गए हो शायद ही कोई किसान सभी प्रपत्र एकत्र कर मुआवजा ले पाए। जमीन किसी के नाम पर है और किसी ने अपने नाम पर आलू भंडारित किया है।

लेखपाल सभी आलू फसलों को राजस्व अभिलेख में दर्ज नहीं करते हैं और अब दर्ज करने के लिए लेखपाल भ्रष्टाचार करेंगे। श्री कटियार ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि यदि सरकार वास्तव में किसानों को मुआवजा देना चाहती है। तो आलू भंडारण का पूरा किराया शीतग्रह मालिकों को दिया जाये। जिससे किसानों को लाभ मिल सके।

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