फर्रुखाबाद(एफबीडी न्यूज) 20 अक्टूबर 26। बौद्ध भिक्षुओं एवं बुद्ध अनुयाइयों ने अशोक विजयदशमी के अवसर पर धम्म विजय दिवस को धूमधाम से मनाया। संकिसा स्थित शाक्य मुनि बुद्ध विहार में भिक्षु संघ के अध्यक्ष डॉ धम्मपाल महाथैरो आदि भंते गणों ने अशोक विजयदशमी पर्व मनाया। उन्होंने अशोक विजयदशमी पर्व पर गर्व जाहिर करते हुए अनुयायियों को मंगलकामनाएं भेंट की है। इस अवसर पर सम्राट अशोक के जीवन काल की चर्चा करते हुए उनसे प्रेरणा लेने का आवाहन किया गया। संकिसा स्थित बोधी पुस्तकालय एवं महा समता बुद्ध विहार में भिक्षु चेतसिक बोधी, भिक्षु नागसेन भिक्षु धम्म कीर्ति आदि भिक्षुओं के द्वारा भी विजयदशमी पर्व को धूमधाम से मनाया गया। 
संकिसा स्थित धम्मालोंको बुद्ध विहार सेवा ट्रस्ट के उप प्रबंधक रघुवीर सिंह शाक्य, डॉ देवेश शाक्य, नर्सरी वाले सुखराम शाक्य, प्रधान अनंगपाल कुशवाहा, अखिल भारतीय शाक्य महासभा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ आलोक सिंह शाक्य, अवनीश शाक्य, कमल शाक्य उर्फ ठाकुर आदि बौद्ध अनुयायियों ने विजयदशमी पर्व को मनाते हुए एक दूसरे को बधाई दी है।
विजय दशमी बौद्धों का पवित्र त्यौहार
सम्राट अशोक के कलिंग युद्ध में विजयी होने के दसवें दिन तक मनाये जाने के कारण इसे अशोक विजयदशमी कहते हैं। इसी दिन सम्राट अशोक ने बौद्ध धम्म की दीक्षा ली थी। ऐतिहासिक सत्यता है कि महाराजा अशोक ने कलिंग युद्ध के बाद हिंसा का मार्ग त्याग कर बौद्ध धम्म अपनाने की घोषणा कर दी थी। बौद्ध बन जाने पर वह बौद्ध स्थलों की यात्राओं पर गए। तथागत गौतम बुद्ध के जीवन को चरितार्थ करने तथा अपने जीवन को कृतार्थ करने के निमित्त हजारों स्तूपों ,शिलालेखों व धम्म स्तम्भों का निर्माण कराया। सम्राट अशोक के इस धार्मिक परिवर्तन से खुश होकर देश की जनता ने उन सभी स्मारकों को सजाया संवारा तथा उस पर दीपोत्सव किया।
यह आयोजन हर्षोउल्लास के साथ 10 दिनों तक चलता रहा, दसवें दिन महाराजा ने राजपरिवार के साथ पूज्य भंते मोग्गिलिपुत्त तिष्य से धम्म दीक्षा ग्रहण की। धम्म दीक्षा के उपरांत महाराजा ने प्रतिज्ञा की, कि आज के बाद मैं शास्त्रों से नहीं बल्कि शांति और अहिंसा से प्राणी मात्र के दिलों पर विजय प्राप्त करुंगा। इसीलिए सम्पूर्ण बौद्ध जगत इसे अशोक विजय दशमी के रूप में मनाता है। अशोक विजयदशमी के अवसर पर ही 14 अक्टूबर 1956. के दिन डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर ने नागपुर की दीक्षाभूमि पर अपने 5 लाख समर्थकों के साथ तथागत भगवान गौतम बुद्ध की शरण में आये और बौद्ध धर्म ग्रहण किया ,इस कारण इस दिन को” धम्म चक्र परिवर्तन” दिवस के रूप में भी मनाया जाता है।






















