फर्रूखाबाद। (एफबीडी न्यूज़) जिला प्रशासन द्वारा सतर्कता के लिए मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। आज सायं अग्निशमन कार्यालय फतेहगढ़ में जिलाधिकारी आशुतोष कुमार द्विवेदी व पुलिस अधीक्षक आरती सिंह की उपस्थिति में नागरिक सुरक्षा फर्रूखाबाद द्वारा मॉकड्रिल का आयोजन किया गया। सायं 6 बजने पर सायरन बजाकर ब्लैकआउट किया गया। 2 मिनिट बाद पुनः सायरन बजने पर मॉकड्रिल शुरू हुई। मॉकड्रिल में सर्वप्रथम फायर टेंडर द्वारा लगाई गई आग को बुझाया गया। इसके बाद घायलों का रेस्क्यू कर उनका प्राथमिक उपचार किया या गया। छत पर मौजूद घायलों को रस्सी के सहारे उतारकर प्राथमिक उपचार कर अस्पताल ले जाया गया।
इस अवसर पर अपर पुलिस अधीक्षक, नगर मजिस्ट्रेट, क्षेत्राधिकारी सदर,क्षेत्राधिकारी मोहम्दाबाद, चिकित्सा विभाग के अधिकारी आरसी माथुर, डॉक्टर्स, अधिकारी,आपदा विशेषज्ञ, होमगार्ड, पी0आर0डी0जवान, आपदा मित्र उपस्थिति रहे।
पकड़े गए नशेड़ी ड्राइवर

आज जिला आबकारी अधिकारी गुरु प्रसाद गुप्ता तथा एआरटीओ प्रवर्तन सुभाष राजपूत द्वारा नगर में मदिरा की दुकानों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का उद्देश्य था कि दुकानों पर मदिरापान कर वाहन न चलाने का संदेश लिखा है अथवा नहीं। संयुक्त टीम द्वारा चार दुकानों का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण में शराब पीकर वाहन ने चलाने का संदेश लिखा पाया गया। ठेकेदारों को यह भी सुझाव दिया गया कि यह संदेश दूर से ही पढ़ा जा सके। ज्ञातव्य है कि जनपद में मदिरा की 304 दुकानें हैं तथा आबकारी नीति के अनुसार दुकानों पर यह संदेश लिखा जाना अनिवार्य है। एआरटीओ प्रवर्तन सुभाष राजपूत द्वारा क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी अनिल यादव के साथ नगर के पंप पर पेट्रोल लेने वाले दो पहिया वाहनों की जांच की गई। 
जांच में काफी संख्या में दो पहिया वाहन बिना हेलमेट के पेट्रोल लेते हुए पाए गए जबकि पेट्रोल पंप पर नो हेलमेट नो पेट्रोल का बोर्ड लगा था। ऐसे 35 वाहनों को चालान कर दिया गया। चालान की कार्यवाही रामशरण अग्रवाल फिलिंग स्टेशन तथा गुप्ता फ्यूल सर्विस पर की गई। एआरटीओ प्रवर्तन द्वारा मद्यपान कर दो पहिया वाहन चलाने के अभियोग में 2 ड्राइवरों के चालान किए गए। यह अभियान आगे भी जारी रहेगा। आज की कार्यवाही में विभाग द्वारा रुपये 255000 का जुर्माना लगाया गया। एआरटीओ प्रवर्तन द्वारा तीन अवयस्क वाहन चलाते हुए पाए जाने पर उन पर 26-26 हजार का जुर्माना लगाया गया। अब इन प्रकरणों को न्यायालय में भेज कर दंडित कराया जाएगा, जिसके अंतर्गत अभिभावक को 3 वर्ष का कारावास हो सकता है।













