फर्रुखाबाद (एफबीडी न्यूज़) 21 अगस्त। घटिया हाइब्रिड आलू ने प्रदेश के बाहर की मंडियों में फर्रुखाबाद जिले को बदनाम कर दिया है। सरकारी मशीनरी ने ही हाइब्रिड आलू की ख्याति, पुखराज आदि किस्मों के बीज तैयार किए हैं। इस आलू का उत्पादन एक बीघा में करीब 70 से 80 पैकेट होता है। इस आलू में पानी की मात्रा अधिक होने के कारण खाने में कोई स्वाद नहीं होता है। चिपसोना, 3797 एवं हाइलैंड आलू की पैदावार प्रति बीघा 40 से 50 पैकेट का उत्पादन होता है। इस आलू में पानी की मात्रा कम होने से स्वाद लाजवाब होता है। जिले में हाइब्रिड आलू का का उत्पादन करीब 60% होता है।
हाइब्रिड आलू की किस्म कमजोर होने के कारण यह बहुत जल्दी दागी होकर खराब होने लगता है। कर्नाटक की मंडियों में करीब 8-10 दिन बाद पहुंचने पर हाइब्रिड आलू खराब हो जाने पर फेंका जाता है। प्रदेश की बाहरी मंडियों में हाइब्रिड आलू की मांग न के बराबर है। मजबूत आलू होने के कारण 3797, चिपसोना एवं हाइलैंड आलू पूरे देश की मंडियों में जबरदस्त मांग होती है। शीतगृहों का हाइब्रिड आलू का पैकेट 200 से 250 रुपए तथा चिपसोना, 3797 आलू का पैकेट 375 से 450 रूपयों के भाव में बिक रहा है।
आलू को फेंकने की नौबत को देखते हुए किसानों ने औने पौने भाव में आलू बेचना शुरू कर दिया है बताया गया है कि महावीर कोल्ड स्टोरेज वाले 60 से 70 में भंडारित आलू का पैकेट खरीद रहे हैं। मालूम हो कि शीतगृह मालिक 110,120 से 130 रुपए प्रति पैकेट का भाड़ा वसूल रहे हैं। बीते दिन सातनपुर मंडी में आलू किसान बचाओ की बैठक में शीतग्रह मालिक मनोज उर्फ पप्पू रस्तोगी ने जिले में घटिया कमजोर आलू के उत्पादन पर चिंता व्यक्त करते हुए मजबूत चिप्ससोना एवं 3797 जैसे आलू का उत्पादन करने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि जनपद फर्रुखाबाद ही आलू की जननी है यहीं से पैदा होकर आलू की आगरा गुजरात एवं बंगाल में पहचान हुई है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 1996 से हाइब्रिड आलू का उत्पादन शुरू हुआ, कम उत्पादन होने व लागत कम होने पर किसानों को फायदा होता था। लेकिन अब बाहर की मंडियों में आलू के दागी हो जाने की शिकायतें मिलती है। उन्होंने बताया की मशीन से खुदाई के दौरान आलू चुटैल हो जाता है जो शीतगृहों में भंडारण के समय खराब होने लगता है। उन्होंने बताया की उत्तर प्रदेश में हाइब्रिड आलू की खपत नहीं होती है यह आलू गुजरात व महाराष्ट्र के आलू को टक्कर नहीं दे पाता।
उन्होंने बताया कि इस समय शीत गृहों में करीब 80% तक आलू भंडारित है जबकि अगले माह से ही आलू की बुवाई शुरू हो जाएगी। इस समय आलू की दयनीय स्थिति है जो 200, 300 व 400 रुपए पैकेट से ज्यादा नहीं बिक रहा है। सरकार को 600 रुपए पैकेट में आलू की खरीदारी करनी चाहिए। मिड डे मील एवं राशन की दुकानों से भी आलू का वितरण होना चाहिए। उन्होंने बताया कि मैंने अपने जीवन के 40 वर्षों में आलू की ऐसी बर्बादी नहीं देखी है। सरकार को शीत ग्रह में भंडारित आलू के भाड़े का भुगतान करना चाहिए। जिससे किसान दोबारा आलू की बुवाई कर सके, किसानों को आंदोलन में भाग लेना चाहिए।
सपा सरकार के दौरान आलू का राशन दुकानों पर वितरण करने एवं बाढ़ पीड़ितों को उपलब्ध कराए जाने के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सराहना की गई। भाजपा सरकार में आलू किसानों की कोई सुनवाई न होने के कारण सरकार को गूंगी बहरी बताकर जमकर कोसा गया। कहा गया की समय रहते यदि सरकार नहीं चेती तो चुनाव में भाजपा को किसानों का गुस्सा झेलना पड़ेगा।

