गैस एजेंसी के फर्जीवाडे में फंस गए अभय व आरती गोस्वामी दम्पति

फर्रुखाबाद (एफबीडी न्यूज़) 22 सितंबर 26। अदालत के आदेश पर कोतवाली फतेहगढ़ पुलिस ने गैस एजेंसी में फर्जीवाडा करने वाले गोस्वामी दंपति के विरुद्ध  केस दर्ज किया है। पुलिस ने कोतवाली फतेहगढ़ के मोहल्ला हाथी खाना निवासी अजय पाल पुत्र स्व देशदीपक की ओर से मोहल्ला कसरट्टा निवासी अभय गोस्वामी व उनकी पत्नी श्रीमती आरती के विरुद्ध मुकदमा कायम किया है। अजय पाल ने दर्ज कराई रिपोर्ट में कहा कि है प्रार्थी के पिता स्व देशदीपक जो कि दिव्यांग थे, जिस कारण भारत सरकार ने स्व देशदीपक एवं स्व० माधुरी देवी के नाम एल०पी०जी० गैस सर्विस वितरण सम्बन्धी लाइसेंस सन् 1984-85 में जारी किया था।

जिसका संचालन उक्त दोनों लोग नियमित रूप से करते रहे उक्त गैस एजेन्सी ही प्रार्थी के परिवार के भरण पोषण का एकमात्र साधन था। उक्त दोनो लोगो को गैस गोदाम व कार्यालय हेतु जमीन स्व० बृजनन्दन लाल गोस्वामी किराए पट्टे पर दी थी सन् 2015 में अंतिम किरायनामा/पट्टा 19 वर्ष 11 माह के लिए बृजनन्दन लाल गोस्वामी ने किया था वर्ष 2018 में स्व0 माधुरी देवी की मृत्यु हो गई जिसके उपरान्त उपरोक्त बृजनन्दनलाल गोस्वामी के पुत्र अभय गोस्वामी ने स्व० देशदीपक के साथ उक्त गैस एजेन्सी में भागीदारी करने की कई बार पुरानी विश्वासपूर्ण सम्बन्धों की दुहाई देकर भागीदार बनाने का प्रस्ताव रखा।

जिसके उपरान्त स्व० देशदीपक एंव अभय गोस्वामी की पत्नी आरती गोस्वामी के मध्य 1.10.20 को क्रमशः 51 प्रतिशत एवं 49 प्रतिशत आरती गोस्वामी के आधार पर अनुबन्ध लिखित किया गया प्रार्थी के पिता स्व० देशदीपक, अभय गोस्वामी पर दिन प्रतिदिन पुराने विश्वासपूर्ण सम्बन्धों के आधार पर अत्यधिक विश्वास करने लगे। जिसके चलते गैस एजेंसी सम्बन्धी समस्त प्रपत्र अभय गोस्वामी की देखरेख में रहते थे, साथ ही प्रार्थी के पिता ने अभय गोस्वामी के कहने पर कोरे कागजों एवं स्टाम्प पर कई बार हस्ताक्षर किये। जिसको प्रार्थी ने स्वयं देखा, चूंकि पिता की बात के आगे प्रार्थी या प्रार्थी के परिजनों का कुछ कहना उनके सम्मान को ठेस पहुंचाता था।

इसलिए प्रार्थी ने कभी भी उनकी उपरोक्त कोरे कागजों स्टाम्पों पर हस्ताक्षर करने का विरोध नही किया। 2022 में प्रार्थी के पिता का स्वास्थ्य दिन प्रतिदिन खराब रहने लगा, तब प्रार्थी के पिता स्व देशदीपक ने अभय गोस्वामी एवं आरती गोस्वामी से नई पार्टनरशिप डीड़ प्रार्थी के साथ बनाने हेतु कई बार कहा। लेकिन अभय एवं आरती गोस्वामी ने एक बार भी पिता जी की बात को महत्व नहीं दिया और आये दिन नई पार्टनरशिप डीड प्रार्थी के साथ बनाने हेतु टालमटोल करते रहे। 30.7.25 को इसी तनाव व बीमारी के कारण स्व देशदीपक की मृत्यु हो गयी।

स्व देशदीपक की मृत्योपरान्त सभी कार्यक्रमों से निवृत होने के उपरान्त प्रार्थी व प्रार्थी के परिजनों ने अभय व आरती गोस्वामी से पुराने अनुबन्ध के अनुसार नई पार्टनरशिप डीड बनाने एवं 1.10. 20 से 30.07.25 तक का हिसाब किताब स्पष्ट करने हेतु कहा। तब अभय गोस्वामी ने अपने द्वारा नियुक्त अधिवक्ताओं से कहकर उत्तराधिकार का मुकदमा न्यायालय में करवाया। इस मुकदमें में जानबूझ कर गलत तथ्य अभय गोस्वामी द्वारा अंकित कराये गये, जबकि उक्त मुकदमें की कोई आश्यकता नही थी।

इसी दौरान 15.04.26 को प्रार्थी गैस गोदाम पर मौजूद था, उसी समय एसबीआई शाखा सधवाड़ा से एक रजिस्ट्री आयी, जिसमें प्रार्थी ने देखा कि आरती गोस्वामी ने प्रार्थी एवं प्रार्थी के परिजनों की सहमति के बिना मेसर्स बलराम जी गैस सर्विस के नाम से बदनियती के चलते एक फर्म का करंट एकाउण्ट खुलवाया है। जबकि पहले से सेन्ट्रल बैंक ऑफ इण्डिया में उक्त फर्म के नाम से खाता संचालित था। उक्त बैंक खाते की सूचना प्रार्थी ने तुरन्त इण्डियन ऑयल कार्पोरेशन बरेली एवं फर्रुखाबाद जिले के सम्बन्धित अधिकारियों को देकर खाता होल्ड कराया। जिसके बाद इण्डियन ऑयल कार्पोरेशन द्वारा उक्त गैस एजेंसी का संचालन अस्थाई रूप से तीन माह के लिए स्थगित कर दिया गया।

प्रार्थी द्वारा उक्त फर्जी बैंक खाते के सम्बन्ध में जब अभय गोस्वामी एवं आरती गोस्वामी से बातचीत की गयी तो अभय एवं आरती गोस्वामी ने 25.09.20 एवं 27.10.20 की फर्जी पार्टनरशिप डीड प्रार्थी को दिखाते हुए कहा कि गैस एजेंसी अब हम ही चलायेंगे, तुम कुछ नहीं कर सकते। उक्त घटना से पूर्व एवं पश्चात कई बार विजय वैश्य एवं इण्डियन ऑयल कर्पोरेशन अधिकारियों के मध्य पंचायत हुयी लेकिन अभय एवं आरती गोस्वामी ने पूर्व अनुबन्ध 1.10.20 के आधार पर नई पार्टनरशिप डीड बनाने हेतु सहमति व्यक्त नहीं की। 1.05.26 एवं 21.05.26 को प्रार्थी ने इण्डियन ऑयल कार्पोरेशन बरेली ऑफिस में उक्त मेसर्स बलराम जी गैस सर्विस से सम्बन्धित प्रपत्रों की छायाप्रतियां प्राप्त करने हेतु लिखित आवेदन दिया।

जिसके उपरान्त प्रार्थी को इण्डियन ऑयल कार्पोरेशन द्वारा प्रपत्र प्राप्त कराये गये। इसी दौरान 08.05.26 को आरती गोस्वामी एवं उनके पति अभय गोस्वामी द्वारा उच्च न्यायालय इलाहाबाद में फर्जी प्रपत्रों के आधार पर याचिका मेसर्स बलराम जी गैस सर्विस आदि बनाम डायरेक्टर इण्डियन ऑयल कपोर्रेशन आदि फर्जी प्रपत्रों के आधार पर बलरामजी गैस सर्विस के संचालन को नियमित करने एवं स्थगन आदेश को 17.04.26 को खारिज करने हेतु असत्य एवं फर्जी प्रपत्रों के आधार पर याचना की गयी। इसी याचिका में याची आरती गोस्वामी स्वंय को वर्ष 1985 से एलपीजी वितरक के रूप में कथन किया है।

साथ ही 27.10.20 की एक फर्जी पार्टनरशिप डीड एवं 4.06.25 को एक फर्जी किरायानामा पट्टा विलेख संलग्न किया गया। इसके अतिरिक्त आरती गोस्वामी एवं अभय गोस्वामी ने आपस में सांठगांठ करके एक और नई फर्जी पार्टनरशिप डीड 28.04.26 की प्रति याचिका के साथ संलग्न की। फर्जी पार्टनरशिप डीड 27.10. 20 के ‌द्में अंकित कथन कि इस डीड से पूर्व कोई डीड लिखित नही हुयी है, जबकि 27.10. 20 के पूर्व 1.10.20 को असली पार्टनरशिप डीड लिखित की जा चुकी थी। इसी प्रकार अभय गोस्वामी व आरती गोस्वामी द्वारा प्रार्थी को प्राप्त करायी गयी फर्जी डीड 25.09.20 के कथन कहा कि है कि ‌द्वितीय पक्ष (आरती गोस्वामी) पहले से गैस सर्विस का व्यवसाय सोल प्रोपराइटर के रूप में करती थी, जो कि फर्जी एवं असत्य है।

उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट है कि उक्त अभय गोस्वामी व आरती गोस्वामी ने एक षड्यन्त्र के तहत अपने साथियों के सहयोग से बलराम जी गैस एजेंसी में प्रार्थी के पिता के हक को छलपूर्वक हड़प कर कूटरचना करके माननीय उच्च न्यायालय को गुमराह करते हुए याचिका दायर की गयी है, जो कि न्याय की दृष्टि से एक गंभीर अपराध है। उक्त अभय एवं आरती गोस्वामी तथा उसके अज्ञात साथियों के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज किया जाना आवश्यक है। उक्त प्रकरण से सम्बन्धित समस्त दस्तावेजी एवं मौखिक साक्ष्य प्रार्थी के पास मौजूद है।

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