फर्रुखाबाद एफबीडी न्यूज 23 सितंबर 26। जिले के करीब 20 सीसीडी सरकारी नल को बंद होने से किसान काफी परेशान है। भाजपा विधायकों को किसानों की कोई चिंता नहीं है। किसान नेता अशोक कटियार ने किसानों की जबरदस्त समस्याओं को दूर करने के लिए पत्र भेजकर प्रधानमंत्री से गुहार लगाई है। श्री कटियार ने पीएम को अवगत कराया है कि जनपद फर्रुखाबाद में सिंचाई व्यवस्था से जुड़ी गंभीर समस्या किसानों के सामने खड़ी हो गई है।
जनपद में 346 राजकीय नलकूप मे 80 विभिन्न कारणों से बंद पड़े हैं, जिसके कारण किसानों को अपनी फसलों की सिंचाई के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही निजी नलकूप वाले किसानों को ट्रांसफार्मर उपलब्ध न होने के कारण विद्युत कनेक्शन एवं सिंचाई सुविधा प्राप्त करने में कठिनाई हो रही है। आलू एवं अन्य रबी फसलों की बुवाई का समय निकट है। ऐसी स्थिति में यदि सिंचाई व्यवस्था समय से ठीक नहीं हुई तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
हमारी प्रमुख मांगें हैं
1.जनपद के सभी बंद पड़े राजकीय नलकूपों का तत्काल सर्वे कराकर समयबद्ध ढंग से चालू कराया जाए।
2.जिन नलकूपों में मोटर खराब है, उनकी मोटर तत्काल ठीक/बदलवाकर सिंचाई शुरू कराई जाए।
3.क्षतिग्रस्त पानी की नालियों की मरम्मत तत्काल कराई जाए, ताकि नलकूप चालू होने के बाद पानी खेतों तक पहुंच सके।
4.निजी नलकूपों के लंबित विद्युत कनेक्शनों के लिए आवश्यक ट्रांसफार्मर एवं विद्युत सामग्री शीघ्र उपलब्ध कराई जाए।
5.जिन किसानों ने ट्रांसफार्मर/कनेक्शन के लिए धनराशि जमा कर रखी है, उनके प्रकरणों का विशेष अभियान चलाकर निस्तारण किया जाए।
6.प्रत्येक विकासखंड में राजकीय नलकूपों की स्थिति की सार्वजनिक सूची जारी की जाए—कौन सा नलकूप चालू है, कौन बंद है और कब तक चालू होगा।
7.आलू की बुवाई के मौसम को देखते हुए विशेष सिंचाई नियंत्रण कक्ष/हेल्पलाइन स्थापित की जाए, जिससे किसान अपनी शिकायत तत्काल दर्ज करा सकें।
8.जिलाधिकारी की अध्यक्षता में विद्युत, नलकूप एवं सिंचाई विभाग के अधिकारियों की बैठक बुलाकर 15 दिन की समयसीमा में समस्या का समाधान कराया जाए।
श्री कटियार ने अनुरोध किया है कि किसानों की गंभीर समस्या को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल आवश्यक निर्देश प्रदान करने की कृपा करें, ताकि आगामी फसल की बुवाई एवं सिंचाई प्रभावित न हो। “किसान की फसल बचाना है तो सिंचाई व्यवस्था दुरुस्त कराना जरूरी है।

