फर्रुखाबाद। (एफबीडी न्यूज़) किसानों को भीषण ठंड के दौरान फसलों की बर्बादी के साथ ठंड के कहर से जूझना पड़ रहा है। ऐसे में कृषक कैसे किसान दिवस मनाएं? इसका जवाब भाजपा सरकार जन्म प्रतिनिधि सहित किसी भी विरोधी नेता के पास नहीं है। देखा जाता है कि किसान हजारों रूपयों की लागत लगाकर पसीना बहाकर मेहनत से कई महीनों बाद फसल तैयार करता है। लेकिन आवारा पशु रात के समय किसानों की खून पसीने से तैयार फसलों को घंटे में ही चौपट कर देते हैं। ऐसा नजारा देखकर किसान खून के आंसू बहाता है। भीषण ठंड के मौसम में सभी लोग आराम से घरों के बिस्तर में दुबके रहते हैं लेकिन किसान रात भर लाठी व टॉर्च लेकर अपनी गेहूं आलू एवं सरसों की फसल की रखवाली करते हैं।
इसके साथ ही फसल को सुरक्षित करने के लिए खंबे लगाकर काफी महंगे तार बांधते हैं। लेकिन आवारा जानवरों के झुंड तारों को धागे की छिन्न भिन्न कर देता है। जिले में ऐसा कोई क्षेत्र एवं गांव नहीं है जहां आवारा जानवर न घूम रहे हो। अनेकों क्षेत्र में नील गायों की भी समस्या है। नीलगाय झुंड में रहते हैं जो दिन के समय बागों में छिपे रहते हैं और रात होते ही खेतों में धाबा बोलते हैं। अनुमान लगाया गया कि जितने आवारा पशु गौशालाओं में बंद है उससे ज्यादा आवारा जानवर अभी भी खुले घूम रहे हैं। बताया जाता है की अनेकों गौशालयों से रात के समय आवारा जानवरों को छोड़ दिया जाता है जानवरों को छोड़कर गौशाला संचालक भूसे की बचत करते हैं।
नगर फर्रुखाबाद के सैकड़ों आवारा जानवर रात के समय सीमावर्ती गांव में जाकर फसलों को उजाड़ते हैं। इन आवारा जानवरों के कारण शहर के किनारे सब्जी की पैदावार आधी हो गई है।भाजपा सरकार के 8 साल बीत जाने के बाद भी आवारा जानवरों के विचरण पर रोक नहीं लगी है। पीड़ित किसान शिकायतें करते-करते थक गए हैं। अधिकारी बेशर्मी से जानवर पकड़वाने का वादा करते हैं लेकिन आवारा पशु नहीं पकड़े जा रहे हैं। विभागीय मंत्री भी महिने दो महीनों में आवारा जानवर पकड़वाने का फरमान जारी करते हैं। किसानों के लिए आवारा जानवरों से बड़ी कोई समस्या नहीं है जिले के सभी जनप्रतिनिधि इस समस्या की ओर आंख बंद कर मौन धारण किए हैं। और किसान यूनियन का क्या कहना, जो किसानों की समस्याओं को दूर करने के नाम पर संगठन चलाकर अपना रुतबा जमा रहे हैं।
किसान यूनियन के नेता भी आवारा पशुओं की समस्या से रूबरू है लेकिन वह बड़ी समस्या को दूर करवाने के लिए कोई प्रयास नहीं करते हैं। बीते कई वर्षों में किसान यूनियनों ने आवारा जानवरों को पकड़ने के लिए पहल नहीं की है। वर्तमान में अनेकों वह लोग भी किसान नेता बन गए हैं जिन्होंने कभी खुरपी फावड़े में हाथ नहीं लगाया। जो यह तक नहीं बता सकते हैं कि यह बरसीम चारा है अथवा मेथी सब्जी का पौधा। यदि देखा जाए तो किसानों की सबसे बड़ी समस्या को दूर करने के लिए कई दशकों से कोई प्रयास नहीं किया गया है। किसान इस समस्या से स्वयं जूझ रहा है और अपना परिवार पालने के लिए ठंड में ऐसे ही जूझता रहेगा भले ही ठंड में उसके प्राण निकल जाए।
नगर वासी भी दुःखी
नगर फर्रुखाबाद कायमगंज एवं टाउन एरिया में भी आवारा जानवरों की वजह से दुकानदार व राहगीर काफी परेशान है। आवारा पशुओं के हमले से आए दिन लोगों की मौत हो जाती है। एशिया की सबसे बड़ी सातनपुर आलू मंडी में सैकड़ों आवारा पशु दिन में घूमते रहते हैं जो किसानों का आलू खाकर हजारों का नुकसान करते हैं। रात के समय जब आवारा जानवरों को खुला आलू नहीं मिलता है तो वह आलू के भरे पैकेट फाड़ कर व्यापारियों का आलू खाकर नुकसान करते हैं। मंडी प्रशासन भी किसानों व व्यापारियों की भीषण समस्या की ओर कोई ध्यान नहीं देता।




