फर्रुखाबाद (एफबीडी न्यूज़) 15 जून। पूत के पांव पालने में ही दिखाई देने लगते हैं, इस कहावत को सार्थक कर दिखाया है नन्हे आधवन जौहरी ने। मात्र 1 वर्ष 6 माह की आयु में आदवन ने अपनी असाधारण प्रतिभा के बल पर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में अपना नाम दर्ज कराकर परिवार, क्षेत्र और जनपद का गौरव बढ़ाया है। नगर के तलैया फ़ज़ल इमाम निवासी आकांक्षा सक्सेना के पुत्र आधवन ने हासिल की यह उपलब्धि आधवन की माँ आकांक्षा सक्सेना की कोको क्रिएशन मीडिया एजेंसी है और साथ ही आस विकाश सीड फाउंडेशन की डायरेक्टर है। पिता साजन शंकर जौहरी ब्लैक रॉक कंपनी में वाइस प्रेसिडेंट के पद पर बैंगलोर में कार्यरत हैं। इस उपलब्धि पर परिवार उत्साहित है।
इतनी कम उम्र में आधवन ने शरीर के 16 अंगों की पहचान, अंग्रेज़ी वर्णमाला से संबंधित शब्दों को याद रखना, 3 राष्ट्रीय प्रतीकों की पहचान करना तथा पेन को सही ढंग से पकड़ना जैसी उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उसकी सीखने की क्षमता और जिज्ञासा ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया है। परिजनों के अनुसार आधवन ने मात्र एक वर्ष की आयु से ही पेंसिल पकड़कर कागज़ पर रेखाएँ बनाना शुरू कर दिया था। धीरे-धीरे पुस्तकों के प्रति उसकी विशेष रुचि दिखाई देने लगी। खेल-खेल में उसे सिखाने का प्रयास किया गया, जिसका परिणाम आज सभी के सामने है। वर्तमान में वह शरीर के अधिकांश अंगों को पहचान लेता है, विभिन्न जानवरों की आवाज़ों की नकल करता है तथा घंटों पेंसिल लेकर रेखाचित्र बनाने में आनंद लेता है।
वर्तमान में आधवन बंगलौर में अपने माता पिता और दीदी के साथ में रह रहे है ये रिकॉर्ड भी आधवन ने बंगलौर में ही बनाया है। शैक्षणिक प्रतिभा के साथ-साथ आधवन के संस्कार भी विशेष रूप से उल्लेखनीय हैं। कम आयु से ही अपने मामा के साथ मंदिर जाने के कारण उसमें पूजा-पाठ के प्रति रुचि विकसित हो गई है। मंदिर में जाकर तिलक लगाना, हाथ जोड़कर प्रणाम करना तथा प्रसाद प्राप्त करने की उत्सुकता उसके दैनिक व्यवहार का हिस्सा बन चुकी है। परिवार के सदस्य बताते हैं कि जब भी वह किसी मंदिर के पास से गुजरता है तो उत्साहपूर्वक “जय-जय” बोलता है और श्रद्धा से हाथ जोड़ता है। आधवन की यह उपलब्धि न केवल उसके परिवार के लिए बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गर्व और प्रेरणा का विषय है।
परिवार ने इस अवसर पर सभी शुभचिंतकों, रिश्तेदारों और मित्रों का हृदय से आभार व्यक्त किया है, जिन्होंने आधवन को अपना स्नेह, आशीर्वाद और प्रोत्साहन प्रदान किया। नन्हे आधवन की यह सफलता इस बात का प्रमाण है कि उचित मार्गदर्शन, सकारात्मक वातावरण और संस्कारों के साथ बच्चों की प्रतिभा प्रारंभिक अवस्था में ही निखर सकती है।
